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फासीवादी अर्थशास्त्र स्वयं को मुक्त बाजार पूँजीवाद तथा साम्यवाद के मध्य स्थापित करता है। यह पूँजीवाद की आलोचना करता है कि वह सामूहिक लक्ष्यों की अपेक्षा लाभ को प्राथमिकता देता है, सट्टेबाजी को बढ़ावा देता है, तथा ऐसी वित्तीय चतुराई करता है जो सूदखोरी के समान है। यह कुछ हद तक साम्यवादियों से सहमत था कि पूँजीपति वर्ग श्रमशक्ति का शोषण करता है और खराब कार्यदशाओं के प्रति असंवेदनशील है, किंतु समाधान पर असहमत था।

जहाँ साम्यवादी उत्पादन के साधनों पर सर्वहारा के अधिकार तथा उसके पश्चात सर्वहारा की तानाशाही को पूँजीवाद के संकट का रामबाण मानते थे, वहीं फासीवाद श्रम एवं पूँजी के बीच वर्ग-संघर्ष को राज्य की मध्यस्थता तथा अर्थव्यवस्था पर निगमीय नियंत्रण के माध्यम से सुलझाना पसंद करता था। निगमवाद (corporatism) समाज को राज्य के अधीन 'निगमों' में संगठित करने का सिद्धांत एवं व्यवहार है। ये निगम राजनीतिक परामर्श के अंगों के रूप में कार्य करते तथा अपने अधिकार-क्षेत्र के व्यक्तियों एवं गतिविधियों का उत्तरदायित्व वहन करते।

यह साम्यवाद से भिन्न था क्योंकि यह वर्गविहीन समतावाद को अस्वीकार करता था। इसे सामंती श्रेणी-संघ (guild) समाजों के आधुनिक प्रतिरूप के रूप में वर्णित किया जा सकता है। इस प्रकार निगमवाद ने सामंतवाद की सामाजिक व्यवस्था एवं पदानुक्रम को बनाए रखा, साथ ही उसमें सैन्य प्रतिस्पर्धा एवं शस्त्र-दौड़ के अधिक अनुकूल आधुनिक औद्योगिक पद्धतियों का समावेश किया।

फासीवाद का सामंती अर्थशास्त्र से एक और साझा पक्ष सूदखोरी विरोधी नियमों पर बल देना था। दोनों ही ऋण पर ब्याज लेने को शोषणकारी एवं अनैतिक मानते थे। इसने एक ऐसा विश्व-दृष्टिकोण सुदृढ़ किया जो कृषि एवं उद्योग जैसे मूर्त क्षेत्रों को मूल्य-सृजक तथा वित्त को छल एवं हेर-फेर पर टिका क्षेत्र मानता था।

गद्यांश के अनुसार, फासीवाद ने निम्नलिखित में से क्या किया? नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।

1.ब्याज लेने को अनैतिक माना
2.कृषि और उद्योग को मूल्यवान माना
3.सामंतवाद की श्रेणियों को अस्वीकार किया
4.निगमवाद में विश्वास किया
Aकेवल 1 और 4
Bकेवल 1, 2 और 3
Cकेवल 1, 3 और 4
Dकेवल 1, 2 और 4 ✓ Correct
Correct answer: (D) केवल 1, 2 और 4
Explanation

फासीवाद ने ब्याज को अनैतिक माना, कृषि और उद्योग को मूल्यवान माना और निगमवाद में विश्वास किया, अतः उत्तर 1, 2 और 4 है।

गद्यांश कहता है कि फासीवाद, सामंती अर्थशास्त्र की भाँति, ब्याज लेने को अनैतिक मानता था।

यह कृषि और उद्योग जैसे मूर्त क्षेत्रों को मूल्य-सृजक मानता था।

यह निगमवाद में विश्वास करता था, समाज को राज्य के अधीन निगमों में संगठित करना।

इसने सामंतवाद की श्रेणियों को अस्वीकार नहीं, बल्कि बनाए रखा।

अतः सामंती श्रेणियों को अस्वीकार करना असत्य है, और सही समुच्चय कथन 1, 2 और 4 है।

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