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संकेतशास्त्रीय (semiotic) परंपरा के अनुसार, संचार संकेतों का _______ मध्यस्थन है।

Aअति-व्यक्तिपरक (extra-subjective)
Bअ-व्यक्तिपरक (non-subjective)
Cअंतर-व्यक्तिपरक (inter-subjective) ✓ Correct
Dमहा-व्यक्तिपरक (macro-subjective)
Correct answer: (C) अंतर-व्यक्तिपरक (inter-subjective)
Explanation

संकेतशास्त्रीय (semiotic) परंपरा में संचार मनों के बीच साझा संकेतों का अंतर-व्यक्तिपरक (inter-subjective) मध्यस्थन है।

अर्थ निजी नहीं होता, बल्कि संकेत-प्रयोक्ता एक साझा कूट के आधार पर उसे संयुक्त रूप से रचते हैं।

अति-व्यक्तिपरक (extra-subjective) अर्थ को सभी प्रतिभागियों के बाहर रखकर संकेतन के साझा कार्य की उपेक्षा करता है।

अ-व्यक्तिपरक (non-subjective) अर्थ से किसी भी मानव व्याख्याकार को हटा देता है और संकेतों को निरे पदार्थ मान लेता है।

महा-व्यक्तिपरक (macro-subjective) अर्थ को पूरे समाज तक फैला देता है पर संकेतों के अंतर-वैयक्तिक स्वरूप को चूक जाता है।

पीयर्स और सस्यूर के बाद संकेतशास्त्र बल देता है कि संकेत इसी साझा, मनों-के-बीच समझ से ही कार्य करता है।

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