संकेतशास्त्रीय (semiotic) परंपरा के अनुसार, संचार संकेतों का _______ मध्यस्थन है।
संकेतशास्त्रीय (semiotic) परंपरा में संचार मनों के बीच साझा संकेतों का अंतर-व्यक्तिपरक (inter-subjective) मध्यस्थन है।
अर्थ निजी नहीं होता, बल्कि संकेत-प्रयोक्ता एक साझा कूट के आधार पर उसे संयुक्त रूप से रचते हैं।
अति-व्यक्तिपरक (extra-subjective) अर्थ को सभी प्रतिभागियों के बाहर रखकर संकेतन के साझा कार्य की उपेक्षा करता है।
अ-व्यक्तिपरक (non-subjective) अर्थ से किसी भी मानव व्याख्याकार को हटा देता है और संकेतों को निरे पदार्थ मान लेता है।
महा-व्यक्तिपरक (macro-subjective) अर्थ को पूरे समाज तक फैला देता है पर संकेतों के अंतर-वैयक्तिक स्वरूप को चूक जाता है।
पीयर्स और सस्यूर के बाद संकेतशास्त्र बल देता है कि संकेत इसी साझा, मनों-के-बीच समझ से ही कार्य करता है।
Want more like this? Create a free account to practise a full test, track your progress, and get spaced-repetition review.
Practise on Mcqkart →🎓 Book an expert →