प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger) ने हाल ही में 50 वर्ष पूरे किए। प्रायः दोहराई जाने वाली एक सुर्खी यह थी कि बाघों की संख्या 2018 के 2,967 से बढ़कर 2022 में 3,167 हो गई। यह एक कटु सत्य को छिपा देती है: भारतीय बाघ के अस्तित्व के लिए अपनी पश्चिमी जीवनशैली से समझौता करने को तैयार नहीं हैं। अधिकांश मध्यमवर्गीय भारतीय राष्ट्रीय पशु के लिए अपना दूसरा या निवेश वाला घर, अथवा बहुलेन राजमार्ग पर पहाड़ों की ओर गाड़ी चलाना छोड़ने से घृणा करेंगे। आप बाघ की आवश्यकताओं को भी नहीं बदल सकते—यह एक विशाल, एकाकी प्राणी है।
एक मादा बाघ को अच्छे शिकार-आधार सहित लगभग 15 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की आवश्यकता होती है। यदि वह प्रजनन करती है, तो उन शावकों को अतिरिक्त स्थान चाहिए होगा। आँकड़े दर्शाते हैं कि 30% बाघ संरक्षित क्षेत्रों के बाहर, अर्थात हमारे बीच रहते हैं। हम जितना अधिक शहरीकरण, राजमार्गों तथा औद्योगिक पार्कों से उनके आवास को खंडित करेंगे, उतना ही वे असंरक्षित क्षेत्रों की ओर विवश होंगे। आइए अपना दृष्टिकोण बदलें।
मैं प्रोजेक्ट टाइगर की 75वीं वर्षगाँठ तक तीन परिणामों की वकालत करता हूँ। पहला, बाघों की संख्या अनवरत बढ़ाने के स्थान पर भारत एक ऐसा मानक निर्धारित एवं प्राप्त कर सकता है जो वर्तमान संख्या से बहुत अधिक न हो। स्मरण रहे, 1000 बाघ पहले से ही खेतों एवं गाँवों के आसपास विचरण करते हैं; इससे अधिक होना एक आपदा होगी। दूसरा, जो हमारे पास है उसका बेहतर संरक्षण करें। संरक्षित बाघ-आवास को अबाधित रखना महत्वपूर्ण है।
असंरक्षित पारिस्थितिकी तंत्रों को अक्षुण्ण रखने में निवेश आर्थिक रूप से व्यवहार्य तथा कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) का भाग होना चाहिए। तीसरा, मनुष्यों के साथ टकराव कम करना अनिवार्य है। इसके लिए निगरानी एवं संचार तकनीक महत्वपूर्ण है। मारे गए पशुधन का मुआवजा शीघ्रता से आँका जाए तथा बाजार दरों से जोड़ा जाए। आने वाली सवा शताब्दी के लिए, आइए गुणवत्ता के विषय में सोचें।
लेखक के अनुसार, प्रोजेक्ट टाइगर की 75वीं वर्षगाँठ को निम्नलिखित में से किसका लक्ष्य नहीं रखना चाहिए? नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
वर्षगाँठ को गुणवत्ता के बजाय मात्रा पर ध्यान देने का लक्ष्य नहीं रखना चाहिए, अतः उत्तर केवल 4 है।
लेखक अंत में आग्रह करता है कि आने वाली चौथाई सदी गुणवत्ता के बारे में सोचे।
अतः गुणवत्ता के बजाय मात्रा पर ध्यान देना ठीक वही है जिसके विरुद्ध वह चेतावनी देता है।
संरक्षित आवासों को अक्षुण्ण रखना वह अनुशंसित करता है।
जनसंख्या को लगभग समान रखना और पशुधन का मुआवजा देना भी उसके सुझाव हैं।
अतः केवल चौथा लक्ष्य ही ऐसा है जिसका लेखक विरोध करता है।
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