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शास्त्रीय भारतीय तर्कशास्त्र (न्याय) के अनुसार, मध्य पद के बहुत व्यापक होने पर कौन-सा तर्कदोष होता है?

Aअनुपसंहारी
Bबाधित
Cसाधारण (Sadharana) ✓ Correct
Dअसाधारण
Correct answer: (C) साधारण (Sadharana)
Explanation

जब मध्य पद बहुत व्यापक होता है तब न्याय का साधारण (Sadharana) हेत्वाभास होता है।

अति-व्यापक हेतु न केवल वहाँ रहता है जहाँ बड़ा पद है, बल्कि वहाँ भी जहाँ वह अनुपस्थित है।

सपक्ष और विपक्ष दोनों में भटकने के कारण यह एक निश्चित निष्कर्ष तय नहीं कर पाता।

ऐसा हेतु इधर-उधर भटकता है और कोई निश्चित परिणाम नहीं देता, अर्थात् अनैकांतिक मध्य पद।

यह अति-सामान्य, भटकता मध्य पद सव्यभिचार के अंतर्गत साधारण प्रकार में गिना जाता है।

अत्यधिक व्यापकता, हेतु का बहुत दूर तक फैल जाना, साधारण हेत्वाभास का लक्षण है।

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