श्रव्य-संगोष्ठी (audio-conferencing) को निम्नलिखित में से किस प्रकार के संचार में वर्गीकृत किया जा सकता है?
श्रव्य-संगोष्ठी (audio-conferencing) को दो-तरफ़ा शाब्दिक संचार में वर्गीकृत किया जाता है, क्योंकि प्रतिभागी शब्दों के माध्यम से बोलते और उत्तर देते हैं।
सभी पक्ष श्रव्य-लिंक पर वापस बोल सकते हैं, जो आदान-प्रदान को अंतःक्रियात्मक और दो-तरफ़ा बनाता है।
यह एकतरफ़ा शाब्दिक नहीं है, क्योंकि श्रोता मौन प्राप्तकर्ता नहीं बल्कि सक्रिय वक्ता होते हैं।
यह एकतरफ़ा अशाब्दिक नहीं है, क्योंकि माध्यम केवल हाव-भाव के बजाय बोले गए शब्द वहन करता है।
यह दो-तरफ़ा अशाब्दिक नहीं है, क्योंकि दृश्यमान शारीरिक संकेतों के बजाय ध्वनि और वाणी माध्यम बनाते हैं।
दूरी पर आवाज़-आधारित पारस्परिक बातचीत श्रव्य-संगोष्ठी को दो-तरफ़ा शाब्दिक के रूप में परिभाषित करती है।
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