निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: इसका अर्थ है बाहर जाना। किसी मठ में प्रवेश के बाद, विद्यार्थियों को सभी सांसारिक और पारिवारिक संबंध त्यागने होते थे। संघ में प्रवेश के बाद वे भिक्षु के रूप में रह सकते थे। इस संस्कार हेतु नियत आयु-सीमा 8 वर्ष थी। किस संस्कार का संदर्भ दिया जा रहा है?
Aप्रव्रज्या (Pabbajja) ✓ Correct
Bउपसंपदा
Cउपनयन
Dजनेऊ
Correct answer: (A) प्रव्रज्या (Pabbajja)
Explanation
'बाहर जाना' अर्थ वाला वह संस्कार, जिसमें नवदीक्षित आठ वर्ष की आयु में मठ में प्रवेश पर सांसारिक और पारिवारिक संबंध त्याग देता था, प्रव्रज्या (Pabbajja) था।
उपसंपदा बाद में की जाने वाली उच्च दीक्षा थी, जो नवदीक्षित को पूर्ण भिक्षु के रूप में स्वीकार करती थी।
उपनयन वैदिक दीक्षा-संस्कार था जो ब्राह्मण विद्यार्थी की शिक्षा का आरंभ चिह्नित करता था।
जनेऊ उपनयन के बाद धारण किया जाने वाला यज्ञोपवीत है, कोई बौद्ध संस्कार नहीं।
प्रव्रज्या के बाद बालक संघ के भीतर सामणेर या नवदीक्षित बन जाता था।
उपसंपदा सामान्यतः बीस वर्ष की आयु में ही प्रदान की जाती थी।
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