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स्वतंत्रता के बाद के काल में उत्पन्न महान सांस्कृतिक पुनर्जागरण के भाग के रूप में, सृजनात्मक गतिविधि के विविध क्षेत्रों में परंपरा के साथ एक अत्यंत सार्थक भेंट हुई। परंपरा की ओर लौटना और उसकी खोज जड़ों की तलाश और पहचान की खोज से प्रेरित थी।

यह हमारी जीवन-शैली, मूल्यों, सामाजिक संस्थाओं, सृजनात्मक रूपों और सांस्कृतिक ढंगों के विऔपनिवेशीकरण (decolonization) की समूची प्रक्रिया का भाग थी। आधुनिक भारतीय रंगमंच, जो औपनिवेशिक रंग-संस्कृति का उत्पाद था, परंपरागत मार्ग से अपने प्रचंड विस्थापन की भरपाई हेतु जड़ों की तलाश की आवश्यकता सर्वाधिक तीव्रता से अनुभव करता था।

बी. वी. कारंत, के. एन. पणिक्कर और रतन थियम जैसे निर्देशकों की परंपरा से अत्यंत सार्थक भेंट हुई और अपने कार्य से उन्होंने समकालीन रंगमंच के औपनिवेशिक मार्ग को उलटकर उसे महान नाट्यशास्त्र परंपरा की पटरी पर लौटा दिया। यह विरोधाभासी लगता है, पर उनका रंगमंच पारंपरिक यथार्थवादी रंगमंच के संदर्भ में अग्रगामी (avant-garde) भी है और फिर भी नाट्यशास्त्र रंग-परंपरा से संबंधित है।

विऔपनिवेशीकरण किस प्रक्रिया को कहते हैं?

Aसे स्वतंत्र होना ✓ Correct
Bपर आश्रित होना
Cपर निर्भर रहना
Dसे सीखना
Correct answer: (A) से स्वतंत्र होना
Explanation

विऔपनिवेशीकरण का अर्थ है से स्वतंत्र होना, इसलिए उत्तर से स्वतंत्र होना है।

विऔपनिवेशीकरण वह प्रक्रिया है जिससे कोई उपनिवेश औपनिवेशिक शासन और प्रभाव से मुक्त होता है।

अनुच्छेद में इसका अर्थ जीवन-शैली, मूल्यों और सृजनात्मक रूपों में औपनिवेशिक प्रतिरूपों को त्यागना है।

अतः इसे औपनिवेशिक नियंत्रण से स्वतंत्र होना सर्वोत्तम रूप से व्यक्त करता है।

पर आश्रित होना विऔपनिवेशीकरण के विपरीत है।

पर निर्भर रहना भी निरंतर निर्भरता सुझाता है, स्वतंत्रता नहीं।

से सीखना प्रभाव का वर्णन करता है, नियंत्रण से मुक्ति का नहीं, जो विऔपनिवेशीकरण का अर्थ है।

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