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देवर्षि नारद को प्रथम संचारक माना जाता है क्योंकि:

Aवे सदैव दूसरों के विरुद्ध बोलते हैं
Bवे घटनास्थल से सूचना देते हैं, पक्षों के बीच मध्यस्थता करते हैं और समाज की भलाई के लिए सोचते हैं ✓ Correct
Cवे हर समय हर जगह नहीं होते
Dवे अपने स्वामी के प्रति निष्ठावान हैं
Correct answer: (B) वे घटनास्थल से सूचना देते हैं, पक्षों के बीच मध्यस्थता करते हैं और समाज की भलाई के लिए सोचते हैं
Explanation

देवर्षि नारद को प्रथम संचारक इसलिए माना जाता है क्योंकि वे घटनास्थल से सूचना देते हैं, पक्षों के बीच मध्यस्थता करते हैं और समाज की भलाई के लिए सोचते हैं।

घटनास्थल से सूचना देना उन्हें लोकों में समाचार का संग्राहक और वाहक बनाता है।

पक्षों के बीच मध्यस्थता करना उन्हें ऐसा सेतु दर्शाता है जो विरोधी पक्षों में समाधान लाता है।

समाज की भलाई हेतु सोचना उनके संचार को रचनात्मक, कल्याण-निर्देशित प्रयोजन देता है।

यह कहना कि वे सदैव दूसरों के विरुद्ध बोलते हैं, उनकी भूमिका को गलत पढ़ता है, जो विभाजक नहीं बल्कि समाधानकारी है।

यह टिप्पणियाँ कि वे हर जगह नहीं होते या मात्र स्वामी के प्रति निष्ठावान हैं, प्रथम संचारक होने का कारण चूक जाती हैं।

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