किसी संकेतित संदेश की प्रभावशीलता को चार दशाएँ प्रभावित करती हैं: प्रेषक के कौशल, अभिवृत्तियाँ और ज्ञान, तथा
प्रेषक के कौशल, अभिवृत्तियों और ज्ञान के अतिरिक्त, संकेतित संदेश को आकार देने वाली चौथी दशा सामाजिक-सांस्कृतिक तंत्र है।
यह बर्लो (Berlo) के SMCR प्रतिमान पर आधारित है, जहाँ स्रोत का सामाजिक तंत्र और संस्कृति संदेश-रचना को नियंत्रित करते हैं।
चौथे कारक को केवल प्राप्तकर्ता के ज्ञान तक सीमित करना प्रतिमान का गलत पठन है, क्योंकि यह स्रोत-पक्षीय दशाएँ गिनाता है।
प्रेषक की आयु बर्लो के नामित स्रोत-कारकों में नहीं है, अतः वह समुच्चय को पूरा नहीं करती।
पर्यावरणीय मुद्दे प्रेषक में स्थित संकेतन-दशा के बजाय एक बाह्य शोर हैं।
कौशल, अभिवृत्तियाँ, ज्ञान और सामाजिक-सांस्कृतिक तंत्र मिलकर तय करते हैं कि स्रोत कितनी अच्छी तरह कूटलेखन करता है।
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