संचार की दृष्टि से, आदि शंकराचार्य की दार्शनिक अवधारणा किसे प्रधानता देती है?
Aवैयक्तिक अहं
Bभौतिकवादी इच्छा
Cआत्म-चेतना (self-consciousness) ✓ Correct
Dसामाजिक संघर्ष
Correct answer: (C) आत्म-चेतना (self-consciousness)
Explanation
संचार की दृष्टि से आदि शंकराचार्य का दर्शन आत्म-चेतना (self-consciousness) को प्रधानता देता है।
उनका अद्वैत विचार आत्मा की शुद्ध चेतना को समस्त ज्ञान और संचार के केंद्र में रखता है।
वैयक्तिक अहं तो ठीक वही है जिसका उनका उपदेश अतिक्रमण करना चाहता है, न कि उसे प्रधानता देना।
भौतिकवादी इच्छा उनके दृष्टिकोण में बंधन मानी जाती है और प्रधान होने से दूर है।
सामाजिक संघर्ष आभासों के बाह्य जगत का अंग है और उनके तत्वमीमांसा में कोई प्रधानता नहीं रखता।
आत्म-चेतना को अग्रभूमि में रखकर वे सच्चे संचार को अपरिवर्ती आत्मा के बोध में आधारित करते हैं।
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