नीचे दो कथन दिए गए हैं। उपर्युक्त कथनों के आलोक में सही उत्तर चुनिए।
दोनों कथन सही हैं, क्योंकि अशाब्दिक संप्रेषण एक ही समय में आंशिक रूप से संस्कृति-बद्ध और आंशिक रूप से सार्विक है।
कथन 1 ठीक है क्योंकि अधिकांश अशाब्दिक संकेतन प्रतीकों के यादृच्छिक प्रयोग पर टिका है, अतः कोई भाव-भंगिमा एक संस्कृति में एक अर्थ और दूसरी में कुछ और रख सकती है।
कथन 2 ठीक है क्योंकि बहुत सा अशाब्दिक संप्रेषण प्रतिमात्मक है, जो जिसका प्रतिनिधित्व करता है उससे मिलता-जुलता है, अतः पूर्व-अधिगम के बिना संस्कृतियों के पार समझा जा सकता है।
दोनों पूरक परतों का वर्णन करते हैं, एक जहाँ अर्थ रूढ़ि से तय होता है और एक जहाँ अर्थ सादृश्य से पढ़ा जाता है।
कोई भी दावा दूसरे को रद्द नहीं करता, अतः किसी एक को असत्य पढ़ना अशाब्दिक चिह्नों की मिश्रित प्रकृति को चपटा कर देगा।
मूल भावों की मुखाकृतियाँ प्रायः इस चित्र के प्रतिमात्मक, व्यापक रूप से साझा पक्ष के रूप में उद्धृत की जाती हैं।
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