फिल्मों में, मौन (silence) के तत्व को किस रूप में पहचाना जाता है?
फिल्म में मौन एक श्रव्य प्रतिमान (aural paradigm) के रूप में कार्य करता है, संभावित ध्वनियों के समुच्चय में से किया गया चयन, जिसका अर्थ इससे आता है कि इसके स्थान पर और क्या सुना जा सकता था।
प्रतिमान किसी एक बिंदु पर संभावनाओं का भंडार है, अतः मौन इसलिए अर्थ देता है क्योंकि वह उस वाणी, संगीत या शोर के विरुद्ध खड़ा है जो उस क्षण को भर सकते थे।
मौन को श्रव्य संरचनाक्रम (syntagm) कहना इसे शृंखला से भ्रमित करता है, जो ध्वनियों का क्रम में खुलता क्षैतिज संयोजन है।
इसे श्रव्य स्थिति बताना इसे केवल स्थान तक सीमित कर देता है और उस चयन को छोड़ देता है जो मौन को अर्थ देता है।
इसे श्रव्य प्रतिरोध मानना एक संघर्ष जोड़ देता है जिसकी प्रतिमानीय व्याख्या को आवश्यकता नहीं।
बार्थ तथा फिल्म संकेतविज्ञान मौन को एक चिह्नित अनुपस्थिति दर्शाते हैं, केवल रिक्तता नहीं बल्कि श्रव्य चयन।
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