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सेट I (जैन सिद्धांत) का सेट II (विवरण) से मिलान कीजिए। सही उत्तर चुनिए।

List I
i.अनेकांतवाद
ii.स्याद्वाद
iii.नयवाद
List II
a.आंशिक दृष्टिकोण, वास्तविकता को भिन्न दृष्टिकोणों से वर्णित करना
b.एक सशर्त दृष्टिकोण, जहाँ सभी निर्णय स्थिति पर निर्भर हैं
c.अनेकांत, वस्तुओं के अनंत अस्तित्व-रूप हैं और केवल केवली सभी पक्ष समझ सकते हैं
Ai-b, ii-a, iii-c
Bi-c, ii-b, iii-a ✓ Correct
Ci-a, ii-b, iii-c
Di-c, ii-a, iii-b
Correct answer: (B) i-c, ii-b, iii-a
Explanation

अनेकांतवाद अनैकांतिकता (non-absolutism) है, जिसके अनुसार वस्तुओं के अनंत अस्तित्व-रूप होते हैं जिन्हें केवल केवली ही पूर्णतः समझ सकते हैं।

स्याद्वाद वह सशर्त दृष्टिकोण है जिसमें प्रत्येक निर्णय सापेक्ष होता है और स्थिति या दृष्टिकोण पर निर्भर करता है।

नयवाद आंशिक दृष्टिकोणों को दर्शाता है, जो वास्तविकता को एक समय में एक विशेष दृष्टिकोण से वर्णित करता है।

ये तीनों सिद्धांत मिलकर वास्तविकता के किसी एकल, निरपेक्ष वर्णन को अस्वीकार करने की जैन दृष्टि प्रकट करते हैं।

केवली वे सर्वज्ञ मुक्त आत्माएँ हैं जो किसी वस्तु के सभी पक्षों को एक साथ ग्रहण करती हैं।

'स्यात्' शब्द, जिसका अर्थ 'किसी अपेक्षा से' है, जैन कथनों के आगे लगकर उनकी सशर्त सत्यता दर्शाता है।

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