'मजदूरी और प्रेम' निबंध में आई पंक्तियों को पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
1.आपने चार आने पैसे मजदूर के हाथ में रखकर कहा "यह लो दिन भर की अपनी मजदूरी।" वाह क्या दिल्लगी है!
2.हल चलाने वाले और भेड़ चराने वाले प्रायः स्वभाव से ही साधु होते हैं।
3.पश्चिमी सभ्यता मुख मोड़ रही है। वह एक नया आदर्श देख रही है।
4.मुझे तो मनुष्य के हाथ से बने कामों में उनकी प्रेममय पवित्र आत्मा की सुगंध आती है।
5.आदमियों की तिजारत करना मूर्खों का काम है। सोने और लोहे के बदले मनुष्य को बेचना मना है।
A1, 2, 4, 3, 5
B2, 1, 4, 5, 3
C2, 1, 3, 4, 5
D3, 1, 4, 5, 2
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