सम्यक् दर्शन (सही श्रद्धा), सम्यक् ज्ञान (सही ज्ञान) और सम्यक् चरित्र (सही आचरण) त्रिरत्न कहलाते हैं। ये किसके तीन स्तंभ हैं?
Aबौद्ध धर्म
Bजैन धर्म ✓ Correct
Cवैदिक शिक्षा
Dउपनिषद
Correct answer: (B) जैन धर्म
Explanation
सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र त्रिरत्न हैं, जो जैन धर्म में मोक्ष-मार्ग बनाने वाले तीन रत्न हैं।
बौद्ध धर्म में इसके स्थान पर बुद्ध, धम्म और संघ का त्रिरत्न तथा अष्टांगिक मार्ग सिखाया जाता है, न कि ये तीन।
वैदिक शिक्षा गुरु के अधीन वेदों और वेदांगों के अध्ययन पर केंद्रित थी, इस त्रयी पर नहीं।
उपनिषद ब्रह्म और आत्मा के दार्शनिक ज्ञान से संबंधित हैं, इस नैतिक त्रयी से नहीं।
सही श्रद्धा, सही ज्ञान और सही आचरण का मिलकर कार्य करना ही जैन के मोक्ष हेतु आवश्यक है।
यह त्रिरत्न उमास्वामी के तत्त्वार्थ सूत्र में वर्णित है, जो एक प्रमुख जैन ग्रंथ है।
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