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संप्रेषण का पूर्वी उपागम निम्नलिखित में से किन आधार-मान्यताओं पर आधारित है?

1.व्यक्ति समाज के प्रति उत्तरदायी नहीं है।
2.प्रभावी संप्रेषण हेतु प्रकृति को नियंत्रित किया जाना चाहिए।
3.समय अनंत है।
4.संसार और ब्रह्मांड एक ही इकाई हैं।
5.लोगों को प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहना चाहिए।
Aकेवल 1, 2 और 3
Bकेवल 2, 3 और 4
Cकेवल 1, 2 और 5
Dकेवल 1, 4 और 5 ✓ Correct
Correct answer: (D) केवल 1, 4 और 5
Explanation

संप्रेषण का पूर्वी उपागम इस पर आधारित है कि व्यक्ति एक वृहत्तर समग्रता का अंग है, संसार व ब्रह्मांड एक इकाई हैं, और मनुष्य को प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहना चाहिए, जो कथन 1, 4 और 5 हैं।

पूर्वी चिंतन व्यक्ति को स्वायत्त सामाजिक अनुबंधकर्ता के बजाय एक वैश्विक समष्टि में अंतर्निहित मानता है।

यह संसार और ब्रह्मांड को एक ही परस्पर-संबद्ध इकाई के रूप में देखता है।

यह प्रकृति पर प्रभुत्व के बजाय उसके साथ सामंजस्य में रहने पर बल देता है।

यह मानना कि प्रभावी संप्रेषण हेतु प्रकृति को नियंत्रित किया जाए, पश्चिमी आधार-मान्यता है, पूर्वी नहीं।

यह समग्रतावादी दृष्टि वेदांत और बौद्ध दर्शन की अन्योन्याश्रयता एवं एकत्व की अवधारणाओं से आती है।

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