'अन्योन्यक्रियात्मक समाज' निम्न के द्वारा अभिलक्षणित होता है:
नेटवर्क युक्त एकीकरण, बहुमाध्यम (मल्टी-मीडिया) और अंकरूपण (डिजिटाइजेशन) अन्योन्यक्रियात्मक समाज को परिभाषित करते हैं, जो कथन 2, 3 और 4 हैं।
नेटवर्क युक्त एकीकरण अलग-अलग उपकरणों और सेवाओं को एक जुड़े हुए जाल में बाँधता है।
बहुमाध्यम एक ही मंच में पाठ, ध्वनि, छवि और वीडियो को मिलाता है, जबकि अंकरूपण विषयवस्तु को सहज भंडारण और साझाकरण हेतु अंकीय रूप में बदलता है।
कथन 1 का गैर-इलेक्ट्रॉनिक संचार इस इलेक्ट्रॉनिक, जुड़े हुए क्रम के विपरीत है और इसमें नहीं आता।
कथन 5 का असंस्कृत जनसंचार परिवेश एक मूल्य-निर्णय है, संरचनात्मक विशेषता नहीं, जिससे यह भी टिकता नहीं।
दूरसंचार, कंप्यूटिंग और जनसंचार का विलय, अर्थात अभिसरण (कन्वर्जेंस), इन अन्योन्यक्रियात्मक लक्षणों का आधार है।
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