किसी संदेश को नया मानसिक और मनोवैज्ञानिक रूप देना, ताकि इसका अर्थ व्यक्ति की मान्यताओं और अभिवृत्तियों के अनुरूप हो, क्या कहलाता है?
किसी संदेश को मानसिक रूप से इस तरह ढालना कि उसका अर्थ अपनी मान्यताओं और अभिवृत्तियों के अनुरूप हो जाए, वह चयनात्मक बोध (selective perception) है।
यहाँ प्राप्तकर्ता संदेश में वही पढ़ लेता है जो स्थापित विश्वासों के अनुकूल हो, उसे व्यक्तिगत पक्षपात से छानकर।
अभिकथन (assertion) का अर्थ है किसी विचार को दृढ़ता और आत्मविश्वास से कहना, यह अभिव्यक्ति-शैली है, अर्थ का पुनर्गठन नहीं।
समर्थन जुटाना (lobbying) का अर्थ है निर्णयकर्ताओं को किसी उद्देश्य की ओर प्रभावित करना, यह अनुनय है, आंतरिक निर्वचन नहीं।
चिंतन (reflection) का अर्थ है विचारपूर्ण मनन, जो स्वयं संदेश को पूर्व-अभिवृत्ति के अनुरूप नहीं मोड़ता।
यह चयनात्मक अनावरण (selective exposure) के बाद आता है, जहाँ लोग पहले अपने विचारों से मेल खाते संदेश चुनते हैं।
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