किसी व्यक्ति के भीतर विचार की दो स्थितियों के बीच अर्थ साझा करना कहलाता है
किसी एक ही व्यक्ति के भीतर विचार की दो स्थितियों के बीच अर्थ साझा करना अंतर्वैयक्तिक संप्रेषण कहलाता है।
यह वह आंतरिक संवाद है जिसके द्वारा व्यक्ति चिंतन करता, संभावनाएँ तौलता, स्वयं से तर्क करता और किसी बाह्य आदान-प्रदान से पहले या बिना निर्णय बनाता है।
यह आत्म-संवाद पूरी तरह व्यक्ति के भीतर, एक ही मन में स्थित भिन्न दृष्टिकोणों के बीच होता है।
स्वार्थी संप्रेषण कोई तकनीकी पद नहीं है और संप्रेषण की किसी मान्यता-प्राप्त श्रेणी को नाम नहीं देता।
अंतरवैयक्तिक संप्रेषण यहाँ गलत है, क्योंकि यह दो या अधिक भिन्न व्यक्तियों के बीच होता है, एक ही व्यक्ति के भीतर नहीं।
आध्यात्मिक संप्रेषण पारलौकिक से जुड़ाव के भाव से संबंधित है और अपने ही विचार-स्थितियों के बीच आंतरिक आदान-प्रदान का वर्णन नहीं करता।
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