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निम्नलिखित में से कौन भारतीय पारंपरिक पुरुषार्थ की अवधारणा द्वारा प्रतिपादित मूल्य नहीं है?

Aधर्म
Bअर्थ
Cभक्ति ✓ Correct
Dमोक्ष
Correct answer: (C) भक्ति
Explanation

भारतीय परंपरा के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष हैं, अतः भक्ति इनमें नहीं है।

धर्म, अर्थात् नैतिक कर्तव्य, जीवन के चार लक्ष्यों में से एक है।

अर्थ, अर्थात् भौतिक समृद्धि और धन, एक अन्य पुरुषार्थ है।

मोक्ष, अर्थात् जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति, सर्वोच्च पुरुषार्थ है।

काम, अर्थात् इच्छाओं की पूर्ति, इनके साथ चार पुरुषार्थों को पूर्ण करता है।

भक्ति, अर्थात् समर्पण, मुक्ति का एक मार्ग है, परंतु स्वयं पुरुषार्थ नहीं गिनी जाती।

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