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निम्नलिखित में से कौन-से प्रत्यक्ष (perception) की सही व्याख्याएँ हैं?

1.इंद्रियार्थसन्निकर्ष, अपनी इंद्रिय(यों) द्वारा वस्तु का प्रत्यक्ष अनुभव
2.अव्यपदेश्य, अशाब्दिक; सही प्रत्यक्ष सुनी-सुनाई बात से नहीं होता
3.अव्यभिचार, भटकता नहीं; सही प्रत्यक्ष बदलता नहीं
4.व्यवसायात्मक, निश्चित; सही प्रत्यक्ष संदेह के निर्णयों को बाहर रखता है
A1, 2 और 3
B2, 3 और 4
C1, 3 और 4
Dउपर्युक्त सभी ✓ Correct
Correct answer: (D) उपर्युक्त सभी
Explanation

चारों पद गौतम की प्रत्यक्ष-परिभाषा के वास्तविक अंग हैं।

इंद्रियार्थसन्निकर्ष उस इंद्रिय-वस्तु सम्पर्क को कहता है जो प्रत्यक्ष उत्पन्न करता है।

अव्यपदेश्य का अर्थ है यह अशाब्दिक है, शब्दों या सुनी बात से नहीं आता।

अव्यभिचार का अर्थ है यह अभ्रांत है, भटककर त्रुटि में नहीं जाता।

व्यवसायात्मक का अर्थ है यह निश्चित है, संदेह के निर्णयों से मुक्त।

ये चारों मिलकर न्याय-परिभाषा में वैध प्रत्यक्ष को चिह्नित करते हैं।

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