मेटा संप्रेषण (metacommunication) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन से सत्य हैं?
मेटा संप्रेषण सदैव आशयपूर्ण नहीं होता, प्रायः स्वतःस्फूर्त रूप से होता है तथा स्वयं को रूपांतरित कर सकता है, अतः कथन 2, 3 तथा 4 सत्य हैं।
कथन 2 ठीक है क्योंकि संदेश को कैसे लिया जाए इसके संकेत अक्सर प्रेषक के जानबूझकर किए नियंत्रण से परे निकल जाते हैं।
कथन 3 ठीक है क्योंकि ऐसे संकेत, स्वर, भाव तथा मुद्रा, मुख्य संदेश के साथ स्वतःस्फूर्त उठते हैं।
कथन 4 ठीक है क्योंकि मेटा संप्रेषण आदान प्रदान के खुलने के साथ स्वयं को समायोजित तथा पुनर्ढाँचित कर सकता है।
कथन 1 में इसे आशयपूर्ण कहना अति संकीर्ण है, क्योंकि इसका बहुत हिस्सा अनियोजित तथा अचेतन होता है।
कथन 5 में इसे स्वयं को संदर्भ रहित करने वाला कहना गलत है, क्योंकि मेटा संप्रेषण अपने संदर्भ से गहराई से बँधा तथा निर्भर होता है।
बेटसन ने मेटा संप्रेषण को संप्रेषण के बारे में संप्रेषण बताया, वह ढाँचा जो हमें बताता है कि संदेश को कैसे पढ़ें।
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