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निम्नलिखित में से किस चीनी यात्री ने नालंदा विश्वविद्यालय को एक फलते-फूलते बौद्ध अधिगम-केंद्र के रूप में पाया, जिसकी विश्वव्यापी प्रतिष्ठा थी और प्रवेश हेतु एक प्रवेश-प्रणाली थी?

Aह्वेनसांग ✓ Correct
Bफ़ाह्यान
Cमेगस्थनीज़
Dउपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct answer: (A) ह्वेनसांग
Explanation

ह्वेनसांग ने नालंदा को एक विश्वप्रसिद्ध बौद्ध केंद्र के रूप में फलता-फूलता पाया, जिसमें प्रवेश-प्रणाली थी।

फ़ाह्यान पहले यात्रा पर आए थे और उन्होंने नालंदा की इस प्रवेश-प्रणाली का यह विवरण नहीं छोड़ा।

मेगस्थनीज़ मौर्य काल के एक यूनानी दूत थे, नालंदा के आगंतुक नहीं।

चूँकि ह्वेनसांग स्पष्ट रूप से मेल खाते हैं, यह दावा कि इनमें से कोई नहीं, गलत है।

उनके अभिलेख नालंदा के शिक्षकों, वाद-विवादों और दैनिक दिनचर्या का विस्तार से वर्णन करते हैं।

वे अनुवाद हेतु अनेक पांडुलिपियाँ चीन ले गए।

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