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भारत सरकार द्वारा स्वतंत्रता के बाद नियुक्त विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग ने भारत में चिकित्सा शिक्षा के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सी सिफ़ारिशें प्रस्तुत कीं?

1.चिकित्सा महाविद्यालयों को अधिकतम एक सौ विद्यार्थियों को प्रवेश देना चाहिए
2.भारतीय प्रणाली के विशेष संदर्भ के साथ चिकित्सा का इतिहास चिकित्सा के प्रथम डिग्री पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाना चाहिए
3.सार्वजनिक स्वास्थ्य, अभियांत्रिकी और नर्सिंग को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए
4.चिकित्सा महाविद्यालय में प्रवेशित प्रति विद्यार्थी दस बिस्तरों का प्रावधान होना चाहिए
Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 2, 3 और 4
D1, 2, 3 और 4 ✓ Correct
Correct answer: (D) 1, 2, 3 और 4
Explanation

1948-49 के विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग ने चिकित्सा शिक्षा हेतु इन चारों कदमों का समर्थन किया।

कथन 1 प्रत्येक चिकित्सा महाविद्यालय में अधिकतम सौ विद्यार्थियों के प्रवेश का पक्षधर था।

कथन 2 ने प्रथम डिग्री पाठ्यक्रम में भारतीय प्रणाली पर बल देते हुए चिकित्सा का इतिहास पढ़ाने का आग्रह किया।

कथन 3 ने सार्वजनिक स्वास्थ्य, अभियांत्रिकी और नर्सिंग को अधिक महत्व देने की बात कही।

कथन 4 ने प्रत्येक प्रवेशित विद्यार्थी हेतु दस बिस्तरों के प्रावधान की संस्तुति की।

इस आयोग की अध्यक्षता डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने की थी।

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