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हमारी प्राचीन शिक्षा-प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

1.ज्ञान को पवित्र माना जाता था और कोई शुल्क नहीं लिया जाता था; समाज के सभी सदस्य शिक्षा-प्रणाली में योगदान करते थे।
2.शिक्षार्थी 'सम्मम बोनम' (परम कल्याण), अर्थात् सर्वोच्च मूल्यों और प्राथमिकताओं के आदर्श के प्रति अपने कर्तव्य और भक्ति पहचानते थे।
3.शिक्षार्थी 'चित्त वृत्ति निरोध', अर्थात् मूर्त संसार से जुड़ी मानसिक गतिविधियों का नियंत्रण, प्राप्त करते थे।
4.ज्ञान का जीवन से कोई संबंध नहीं था।
5.वैदिक शिक्षा में शब्द 'ऋत' के प्राकृतिक व्यवस्था और नैतिक व्यवस्था दो अर्थ हैं।
A2, 3 और 4
B3, 4 और 5
C1, 2, 3 और 5 ✓ Correct
D1, 2, 3, 4 और 5
Correct answer: (C) 1, 2, 3 और 5
Explanation

सही कथन कहते हैं कि ज्ञान पवित्र और निःशुल्क था, शिष्य परम कल्याण और मन के नियंत्रण को खोजते थे, और 'ऋत' का अर्थ प्राकृतिक तथा नैतिक व्यवस्था दोनों था।

कथन 1 सही है, क्योंकि शिक्षा निःशुल्क थी और समस्त समाज इसका सहयोग करता था।

कथन 2 सही है, क्योंकि शिष्य 'सम्मम बोनम' (summum bonum), अर्थात् परम कल्याण के आदर्श की ओर बढ़ते थे।

कथन 3 सही है, क्योंकि लक्ष्य 'चित्त वृत्ति निरोध', अर्थात् मानसिक गतिविधि का शमन था।

कथन 4 गलत है, क्योंकि ज्ञान जीवन से घनिष्ठ रूप से जुड़ा था, उससे अलग नहीं।

कथन 5 सही है, क्योंकि वैदिक चिंतन में 'ऋत' प्राकृतिक और नैतिक दोनों व्यवस्थाओं को धारण करता है।

पवित्र और व्यावहारिक का यह मेल वैदिक शिक्षा के उद्देश्य को चिह्नित करता था।

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