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भारत में प्राचीन शिक्षा-प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य हैं?

1.ऋग्वेद काल के दौरान और बाद में, हमारी प्राचीन शिक्षा-प्रणाली व्यक्ति के समग्र विकास हेतु विकसित हुई।
2.विनम्रता, सत्यनिष्ठा, अनुशासन, आत्मनिर्भरता और सभी सृष्टि के प्रति सम्मान के मूल्य प्राचीन शिक्षा-प्रणाली के दौरान बने।
3.प्राचीन शिक्षा में शिक्षण और अधिगम स्व, परिवार और समाज की ओर पथ का अनुसरण करते थे।
A1 और 2
B2 और 3
C1, 2 और 3 ✓ Correct
D1 और 3
Correct answer: (C) 1, 2 और 3
Explanation

प्राचीन भारतीय शिक्षा के तीनों कथन सत्य ठहरते हैं, जो समग्र विकास, संचित मूल्यों, और स्व से समाज तक विस्तृत होते मार्ग को समेटते हैं।

कथन 1 सही है, क्योंकि ऋग्वेद काल के बाद की शिक्षा व्यक्ति के संपूर्ण विकास पर लक्षित थी।

कथन 2 सही है, क्योंकि विनम्रता, सत्यनिष्ठा, अनुशासन, आत्मनिर्भरता और समस्त सृष्टि के प्रति सम्मान मूल मूल्य थे।

कथन 3 सही है, क्योंकि शिक्षण स्व से परिवार और फिर समाज की ओर बाहर की ओर बढ़ता था।

इन उद्देश्यों ने शिक्षा को चरित्र-निर्माण का साधन बनाया, केवल जानकारी नहीं।

इस सर्वांगीण प्रशिक्षण हेतु शिष्य गुरुकुल में गुरु के साथ रहता था।

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