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भारतीय तर्कशास्त्र के शास्त्रीय संप्रदाय के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन तार्किक रूप से भ्रांतिपूर्ण है क्योंकि मध्य पद अनपवर्जी (non-exclusive) है?

Aपर्वत में अग्नि है क्योंकि वह ज्ञेय है
Bशब्द नित्य है क्योंकि वह श्रव्य है
Cअग्नि शीतल है क्योंकि वह द्रव्य है
Dसभी वस्तुएँ अनित्य हैं क्योंकि वे ज्ञेय हैं ✓ Correct
Correct answer: (D) सभी वस्तुएँ अनित्य हैं क्योंकि वे ज्ञेय हैं
Explanation

दोषपूर्ण तर्क यह है कि सभी वस्तुएँ अनित्य हैं क्योंकि वे ज्ञेय हैं।

यहाँ विषय समस्त वस्तुएँ हैं, अतः ज्ञेयता बिना अपवाद पूरे क्षेत्र में विद्यमान है।

जो मध्य पद सर्वत्र उपस्थित हो वह किसी को अपवर्जित नहीं करता और कोई ऐसा निषेधात्मक उदाहरण नहीं छोड़ता जहाँ वह अनुपस्थित हो।

जब हेतु किसी उदाहरण से अपवर्जित ही न हो, तो साध्य से उसका अविनाभाव संबंध निश्चित नहीं हो सकता।

इतना सर्वव्यापी हेतु कि किसी को अपवर्जित न करे, वही अनपवर्जी, अनिर्णायक मध्य पद है।

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