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एक शिक्षक के समक्ष पाठ्य-सामग्री के संप्रेषण हेतु उपयुक्त शिक्षण-विधि चुनने की समस्या है। दर्शन की कौन-सी शाखा उसकी इस दुविधा का सर्वाधिक उपयुक्त वर्णन करेगी?

Aतत्त्वमीमांसा (metaphysics)
Bज्ञानमीमांसा (epistemology) ✓ Correct
Cमूल्यमीमांसा (axiology)
Dतर्कशास्त्र (logic)
Correct answer: (B) ज्ञानमीमांसा (epistemology)
Explanation

उपयुक्त शिक्षण-विधि चुनने की दुविधा का वर्णन ज्ञानमीमांसा करती है, जो दर्शन की वह शाखा है जो ज्ञान के स्वरूप, स्रोतों और विधियों से संबंधित है।

चूँकि विधि इस बात से जुड़ी है कि ज्ञान कैसे अर्जित और संप्रेषित होता है, यह सीधे ज्ञानमीमांसीय प्रश्नों के अंतर्गत आती है।

तत्त्वमीमांसा वास्तविकता और सत्ता के परम स्वरूप का अध्ययन करती है, यह बताती है कि वास्तविक क्या है, न कि उसे कैसे पढ़ाया जाए।

मूल्यमीमांसा मूल्यों से संबंधित है, जो आचरण की नीतिशास्त्र और सौंदर्य के सौंदर्यशास्त्र में बँटती है, न कि शिक्षण-विधियों से।

तर्कशास्त्र वैध तर्क और निगमन का विज्ञान है, जो सही तर्क से संबंधित है, न कि शैक्षिक चयन से।

ज्ञानमीमांसा, ग्रीक शब्द episteme से, ज्ञान को मात्र विश्वास से अलग करती है और पूछती है कि हम अपने दावों को कैसे न्यायसंगत ठहरा सकते हैं।

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