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सक्रिय अधिगम, जिसमें विद्यार्थी स्वतंत्र रूप से चलते हैं और अपना कार्य तथा गति स्वयं चुनते हैं और शिक्षक एक सुविधाकर्ता होता है; नियमों के सामान्यीकरण तथा संज्ञानात्मक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक विकास सहित समग्र विकास; और समस्या-कथन तथा अन्वेषी या विचार-मंथन विधियों का प्रयोग: ये किस प्रकार के शिक्षण को दर्शाते हैं?

Aपारंपरिक शिक्षण
Bगैर-पारंपरिक शिक्षण ✓ Correct
Cप्राच्य शिक्षण
Dप्राचीन शिक्षण
Correct answer: (B) गैर-पारंपरिक शिक्षण
Explanation

शिक्षार्थी-प्रेरित सक्रिय अध्ययन, समग्र विकास और अन्वेषी या विचार-मंथन आधारित समस्या-समाधान गैर-पारंपरिक शिक्षण को दर्शाते हैं, जहाँ शिक्षक सुविधाकर्ता की भूमिका निभाता है।

पारंपरिक शिक्षण शिक्षक-केंद्रित और व्याख्यान-प्रधान होता है, जिसमें शिक्षार्थी मुख्यतः निष्क्रिय ग्राही रहता है।

प्राच्य शिक्षण पारंपरिक पूर्वी विद्यालयी प्रारूपों को दर्शाता है, न कि इस सुविधाकारी दृष्टिकोण को।

प्राचीन शिक्षण गुरुकुल-प्रकार के ऐतिहासिक अनुदेशन को दर्शाता है, न कि किसी आधुनिक विधि-श्रेणी को।

सुविधाकर्ता प्रारूप विद्यार्थियों को अपनी गति स्वयं तय करने और अपने कार्य स्वयं चुनने देता है।

ऐसी विधियाँ संज्ञानात्मक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक विकास को एक साथ विकसित करती हैं।

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