एक अंग्रेज़ी शिक्षक विद्यार्थियों से एक उपन्यास के विषयों, पात्रों और साहित्यिक उपकरणों का विश्लेषण करते हुए एक मल्टीमीडिया प्रस्तुति बनाने को कहता है। विद्यार्थियों की वास्तविक-समय प्रगति जाँचने हेतु कौन-सा मूल्यांकन सर्वाधिक उपयुक्त है?
प्रामाणिक मूल्यांकन अधिगमकर्ताओं को वास्तविक-जगत के कार्यों और उत्पादों पर आँकता है, इसलिए उपन्यास का विश्लेषण करने वाली मल्टीमीडिया प्रस्तुति इसी से सर्वोत्तम जाँची जाती है, जो कार्य विकसित होते समय प्रगति ट्रैक करती है।
योगात्मक मूल्यांकन शिक्षण के अंत में अधिगम मापता है, किसी चालू परियोजना की वास्तविक-समय प्रगति नहीं।
मानक-संदर्भित मूल्यांकन विद्यार्थी को सहपाठियों के सापेक्ष क्रमित करता है, जो व्यक्तिगत कार्य के उद्घाटन को ट्रैक नहीं करता।
स्व-संदर्भित मूल्यांकन अधिगमकर्ता के वर्तमान प्रदर्शन की तुलना उसके अपने पूर्व प्रदर्शन से करता है, वास्तविक-समय परियोजना प्रगति से नहीं।
प्रामाणिक मूल्यांकन प्रायः रूब्रिक और पोर्टफोलियो से प्रक्रिया को दर्ज करता है, केवल परिणाम नहीं।
यह रचनावादी दृष्टि पर आधारित है कि अधिगम सार्थक अनुप्रयोग से सर्वोत्तम दर्शाया जाता है।
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