पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत के चरणों को आरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
पियाजे की अवस्थाएँ आरोही क्रम में हैं संवेदी-प्रेरक, पूर्व-संक्रियात्मक, मूर्त संक्रियात्मक और औपचारिक संक्रियात्मक, अर्थात क्रम 3, 2, 1, 4।
संवेदी-प्रेरक अवस्था (जन्म से लगभग 2 वर्ष) इंद्रियों और गति के माध्यम से वस्तु-स्थायित्व विकसित करती है।
पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (लगभग 2 से 7 वर्ष) प्रतीकात्मक चिंतन लाती है पर आत्मकेंद्रितता के साथ और संरक्षण के बिना।
मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (लगभग 7 से 11 वर्ष) मूर्त वस्तुओं पर तार्किक चिंतन और संरक्षण की अनुमति देती है।
औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (लगभग 11 वर्ष के बाद) अमूर्त और परिकल्पनात्मक तर्कण को संभव बनाती है।
पियाजे ने विकास को आत्मसातीकरण और समायोजन से होते हुए संतुलन की ओर बढ़ता माना।
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