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संचार विद्वानों का तर्क है कि ग्रंथों का अर्थ केवल लेखक से ही नहीं, बल्कि व्यक्तियों, संस्कृतियों और संदर्भों के बीच होने वाली अंतःक्रियाओं से निकलता है। यह दृष्टिकोण बताता है कि कोई भी ग्रंथ मुख्य रूप से किसका परिणाम है:

Aसामाजिक अंतःक्रिया ✓ Correct
Bतंत्रिका-संबंधी प्रक्रियाएँ
Cप्रशासनिक नियंत्रण
Dयांत्रिक संचरण
Correct answer: (A) सामाजिक अंतःक्रिया
Explanation

वर्णित दृष्टिकोण किसी ग्रंथ को मुख्यतः सामाजिक अंतःक्रिया का परिणाम बनाता है।

यह मानना कि अर्थ व्यक्तियों, संस्कृतियों और संदर्भों के बीच अंतःक्रियाओं से उपजता है, अर्थ के स्रोत को अकेले लेखक में नहीं बल्कि साझा सामाजिक प्रक्रिया में रखता है।

यहाँ अर्थ सह-निर्मित होता है क्योंकि पाठक, परिवेश और समुदाय यह बातचीत करते हैं कि ग्रंथ क्या कहता है।

तंत्रिका-संबंधी प्रक्रियाएँ अर्थ को मस्तिष्क-यांत्रिकी में रखती हैं, जिससे यह सामाजिक विवरण स्पष्टतः आगे बढ़ता है।

प्रशासनिक नियंत्रण अंतर्वस्तु पर संस्थागत सत्ता की ओर संकेत करता है, न कि अर्थ के अंतःक्रियात्मक निर्माण की ओर।

यांत्रिक संचरण संप्रेषण को मात्र संकेत-अंतरण मानता है, जो इस बातचीत-आधारित संदर्भगत वाचन के विपरीत है।

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