विद्यार्थी-जनसांख्यिकी में विविधता समान शैक्षिक मानकों की माँग करती है ताकि
मूल्यांकन हेतु एक समान मानदंड मिलने से जनसांख्यिकीय रूप से विविध विद्यार्थी-समूह को एक ही साझा और तुलनीय स्तर पर मापा जा सकता है।
समान शैक्षिक मानक अपेक्षित दक्षताओं का एक समरूप ढाँचा तय करते हैं, जिससे भिन्न पृष्ठभूमियों के बावजूद उपलब्धि एक जैसी कसौटी पर आँकी जाती है।
केवल उच्च-निष्पादक विद्यार्थियों हेतु वास्तविक अधिगम बढ़ाना एक संकीर्ण वर्ग की बात है, साझा मानकों के समता-उद्देश्य की नहीं।
सभी राज्यों पर केंद्र की समान आवश्यकताएँ थोपना प्रशासनिक एकरूपता है, मूल्यांकन की कसौटी नहीं।
'कोई नहीं' विकल्प इसलिए गलत है क्योंकि एक वैध उद्देश्य, अर्थात् समान मानदंड, स्पष्टतः विद्यमान है।
ऐसे मानदंड मानक-संदर्भित (norm referenced) और मानदंड-संदर्भित (criterion referenced) मूल्यांकन के आधार हैं, जो अधिगमकर्ताओं को एक साझा स्तर पर आँकते हैं।
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