निम्नलिखित में से किसके दौरान समायोजन की प्रक्रिया का उद्देश्य व्यक्ति के जीवन में संतुलन की अवस्था (state of equilibrium) लाना सबसे विशिष्ट होता है?
व्यक्ति को संतुलन की अवस्था में लाने के उद्देश्य वाला समायोजन संज्ञानात्मक विकास के लिए सर्वाधिक विशिष्ट है, जहाँ पियाजे संतुलनीकरण (equilibration) को केंद्रीय बनाते हैं।
पियाजे ने संज्ञानात्मक वृद्धि को आत्मसातीकरण और समायोजन द्वारा संतुलन की खोज से समझाया, जिसे समविन्यास कहा जाता है।
संतुलनीकरण वह स्व-नियमनकारी प्रेरणा है जो नई सूचना से विद्यमान संरचनाओं के विचलित होने पर संतुलन बहाल करती है।
इससे संज्ञानात्मक विकास वह प्रक्रिया बनता है जो संतुलन की खोज से सर्वाधिक परिभाषित होती है।
संवेगात्मक और सामाजिक परिवर्तनों में समायोजन होता है पर वे पियाजे की समविन्यास-अवधारणा पर केंद्रित नहीं हैं।
शारीरिक परिवर्तन परिपक्वन-जनित हैं और संज्ञानात्मक संतुलनीकरण से परिभाषित नहीं होते।
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