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नीचे दो कथन दिए गए हैं। उपर्युक्त कथनों के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनिए:

Statement I:जनसंप्रेषण प्रक्रिया का अध्ययन संदेशों के स्थूल दृष्टिकोण (macroscopic view) से अभिलक्षित होता है
Statement II:संकेतविज्ञान (semiology) संदेशों के विखंडन का सूक्ष्म दृष्टिकोण (microscopic view) खोजता है
Aकथन I और कथन II दोनों सत्य हैं ✓ Correct
Bकथन I और कथन II दोनों असत्य हैं
Cकथन I सत्य है परंतु कथन II असत्य है
Dकथन I असत्य है परंतु कथन II सत्य है
Correct answer: (A) कथन I और कथन II दोनों सत्य हैं
Explanation

दोनों कथन सत्य हैं: जनसंप्रेषण का अध्ययन संदेशों के स्थूल दृष्टिकोण (macroscopic) से चलता है, जबकि संकेतविज्ञान (semiology) उन्हें विखंडित करता सूक्ष्म दृष्टिकोण खोजता है।

कथन 1 टिकता है क्योंकि जनसंप्रेषण शोध समूचे श्रोता वर्गों तथा समाजों में व्यापक प्रतिमानों, प्रवाहों तथा प्रभावों को देखता है।

कथन 2 टिकता है क्योंकि संकेतविज्ञान किसी एकल पाठ की आंतरिक कार्यप्रणाली में झाँकता है, उसके संकेतों, कोडों तथा अर्थ की परतों को अलग करता है।

ये दोनों उपागम पैमाने में पूरक हैं, एक विस्तृत परिदृश्य का सर्वेक्षण करता है, दूसरा अर्थकरण की सूक्ष्मता को जाँचता है।

कोई कथन दूसरे को नहीं काटता, क्योंकि वृहत विश्लेषण तथा निकट पाठ पठन एक ही संप्रेषण के भिन्न प्रश्नों का उत्तर देते हैं।

सस्यूर तथा बार्थ ने पाठों के इस निकट, संकेत दर संकेत विखंडन हेतु संकेतवैज्ञानिक उपकरण गढ़े।

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