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'मैं अपने शिष्यों को कभी नहीं पढ़ाता; मैं केवल वे परिस्थितियाँ प्रदान करने का प्रयास करता हूँ जिनमें वे सीख सकें' यह कथन किसका है?

Aस्वामी विवेकानंद
Bअल्बर्ट आइंस्टीन ✓ Correct
Cश्री अरबिंदो
Dअरस्तू
Correct answer: (B) अल्बर्ट आइंस्टीन
Explanation

यह कथन कि मैं अपने शिष्यों को कभी नहीं पढ़ाता, मैं केवल वे परिस्थितियाँ देने का प्रयास करता हूँ जिनमें वे सीख सकें, अल्बर्ट आइंस्टीन का है।

स्वामी विवेकानंद (A) ने शिक्षा को मनुष्य में पहले से विद्यमान पूर्णता की अभिव्यक्ति कहा।

श्री अरबिंदो (C) ने माना कि कुछ भी सिखाया नहीं जा सकता और शिक्षक सहायक तथा मार्गदर्शक है।

अरस्तू (D) प्राचीन यूनानी दार्शनिक हैं, न कि इस कथन के स्रोत।

यह कथन सुविधा-प्रदाता दृष्टि दर्शाता है, जो शिक्षक को अधिगम-परिस्थितियों का व्यवस्थापक बताता है।

यह निर्माणवाद से मेल खाता है, जहाँ शिक्षार्थी सक्रिय रूप से अपनी समझ का निर्माण करते हैं।

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