किसी विद्यार्थी के व्यवहार के परिणामों का पूर्वानुमान लगाने हेतु उसके पर्यावरण की योजना या व्यवस्था करना कहलाता है
किसी विद्यार्थी के पर्यावरण को इस प्रकार व्यवस्थित करना कि व्यवहार के परिणामों का पूर्वानुमान लगाया जा सके, उद्दीपक नियंत्रण कहलाता है।
यहाँ कोई विशेष उद्दीपक विश्वसनीय रूप से किसी अनुक्रिया और उसके अपेक्षित परिणाम का अवसर तय करता है।
प्रेरण एक अतिरिक्त संकेत देना है जो वांछित अनुक्रिया जगाने में सहायक होता है, समूचे पर्यावरण की व्यवस्था नहीं।
पुनर्बलन किसी अनुक्रिया के बाद परिणाम देकर उसे सुदृढ़ करता है, जो एक भिन्न क्रियाप्रसूत प्रक्रिया है।
आकृतिकरण किसी नए व्यवहार को उसकी ओर बढ़ते क्रमिक सन्निकटनों को पुनर्बलित करके गढ़ता है।
उद्दीपक नियंत्रण स्किनर के क्रियाप्रसूत अनुबंधन से आता है, जहाँ विभेदक उद्दीपक (discriminative stimulus) संकेत देता है कि अनुक्रिया कब पुनर्बलित होगी।
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