विद्यार्थी या व्यक्ति विविध परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से सामना करने की अपनी क्षमता के बारे में सकारात्मक या नकारात्मक विश्वास विकसित कर सकते हैं। इसे कहा जा सकता है
स्व-प्रभावकारिता किसी व्यक्ति का यह विश्वास है, सकारात्मक या नकारात्मक, कि वह विशिष्ट परिस्थितियों में सामना कर सफल हो सकता है।
यह अवधारणा अल्बर्ट बंडूरा ने दी, जिन्होंने इसे प्रेक्षणात्मक अधिगम और व्यक्तिगत कर्तृत्व-बोध से जोड़ा।
उच्च स्व-प्रभावकारिता प्रयास, दृढ़ता और लचीलापन बढ़ाती है, जबकि निम्न स्व-प्रभावकारिता कार्यों से बचाव की ओर ले जाती है।
आत्म-नियमन लक्ष्यों की ओर अपने विचारों और क्रियाओं का प्रबंधन है, क्षमता के बारे में विश्वास नहीं।
आत्म-सम्मान अपने मूल्य का समग्र मूल्यांकन है, जो कार्य-विशिष्ट सक्षमता से व्यापक भाव है।
आत्म-विश्वास एक सामान्य आश्वस्ति है, जबकि स्व-प्रभावकारिता विशेष कार्यों और परिवेश के सापेक्ष आँकी जाती है।
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