जनसंचार माध्यम से संबंधित किसी पाठ की वह व्याख्या, जो मूल रचनाकार के इरादे से भिन्न हो, कहलाती है:
Aअवैयक्तिक कूट-वाचन
Bविचलित कूट-वाचन (deviant decoding) ✓ Correct
Cऊर्ध्व-रेखा कूट-वाचन
Dअसममित कूट-वाचन
Correct answer: (B) विचलित कूट-वाचन (deviant decoding)
Explanation
जनसंचार पाठ की वह व्याख्या जो मूल रचनाकार के अभिप्रेत अर्थ से हटती है, विचलित कूट-वाचन कहलाती है।
यह उस स्थिति को नाम देती है जहाँ दर्शक संदेश को कूटलेखक के अभीष्ट अर्थ के विरुद्ध पढ़ता है।
अवैयक्तिक कूट-वाचन अभिप्राय से भिन्न पठन हेतु मान्य पद नहीं है।
ऊर्ध्व-रेखा पठन एक विज्ञापन-व्यय श्रेणी है और अभिप्राय के विरुद्ध व्याख्या से इसका कोई संबंध नहीं।
असममित कूट-वाचन रचनाकार के अर्थ से टूटने वाले पठन का स्थापित नाम नहीं है।
अतः विचलित कूट-वाचन दर्शक के विरोधी या विचलित पठन को दर्शाता है।
यह विचार स्टुअर्ट हॉल के कूटलेखन एवं कूटवाचन प्रतिमान से जुड़ता है।
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