जो ज्ञान अनुमान या तर्क के प्रयोग के बिना अर्जित होता है, वह कहलाता है
जो ज्ञान अनुमान या तर्क के प्रयोग के बिना अर्जित होता है, वह अंतर्ज्ञानात्मक ज्ञान (intuitive knowledge) कहलाता है, जो सीधे और तत्काल ग्रहण होता है।
अंतर्ज्ञान में सत्य को तर्क या प्रमाण की श्रृंखला के बिना एक ही बार में समझ लिया जाता है।
प्रदर्शनात्मक ज्ञान चरण-दर-चरण प्रमाण और तर्क से प्राप्त होता है, जो अंतर्ज्ञान के विपरीत है।
तार्किक ज्ञान आधार-वाक्यों से निष्कर्ष तक के अनुमान पर टिका है, जिसमें फिर तर्क का प्रयोग अनिवार्य है।
अनुभवजन्य ज्ञान इंद्रियों और जीवंत अनुभव से आता है, न कि तर्क-रहित प्रत्यक्ष अंतर्दृष्टि से।
जॉन लॉक (John Locke) ने ज्ञान को अंतर्ज्ञानात्मक, प्रदर्शनात्मक और संवेदनात्मक में बाँटा, जिसमें अंतर्ज्ञानात्मक सर्वाधिक निश्चित है।
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