शिक्षण-कैरियर के आरंभ में सबसे महत्त्वपूर्ण एकल कारक है
शिक्षण-कैरियर के आरंभ में सबसे निर्णायक कारक शिक्षक का व्यक्तित्व और कक्षा तथा विद्यार्थियों से जुड़ने की क्षमता है।
मेधावी शैक्षिक अभिलेख (A) शिक्षक की अपनी विद्वत्ता दर्शाता है पर अधिगमकर्ताओं से तालमेल सुनिश्चित नहीं करता।
संप्रेषण-कौशल (B) महत्त्वपूर्ण है, फिर भी विद्यार्थियों से जुड़ने वाले व्यापक व्यक्तित्व का एक ही अंग है।
संगठन-क्षमता (D) कक्षा-कार्य के प्रबंधन में सहायक है पर स्वयं शिक्षक-विद्यार्थी संबंध नहीं बनाती।
आत्मीयता और सौहार्द (शिक्षक-विद्यार्थी संबंध) वह भावात्मक आधार है जिस पर प्रत्येक शिक्षण-कौशल कार्य करता है।
आरंभिक वर्षों में व्यक्तित्व और संबंध-निर्माण की क्षमता ही विद्यार्थियों का विश्वास अर्जित करती है।
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