शिक्षक विषय-वस्तु प्रस्तुत करता और विद्यार्थियों को पाठ में निर्देशित करता है। एक नियम उदाहरण सहित प्रस्तुत किया जाता है और फिर अभ्यास दिया जाता है। इसे कहते हैं
जब शिक्षक विषय-वस्तु प्रस्तुत करता, विद्यार्थियों को पाठ में निर्देशित करता और उदाहरण सहित नियम देकर फिर अभ्यास कराता है, तो यह व्याख्यात्मक शिक्षण (expository teaching) है।
व्याख्यात्मक शिक्षण संगठित, तैयार विषय-वस्तु को निगमनात्मक रूप से देता है, सामान्य नियम से उदाहरण और फिर अभ्यास तक।
प्रत्यक्ष अनुदेशन इससे अतिव्यापी है, पर यह वर्णित नियम-उदाहरण प्रस्तुति के बजाय शिक्षक-नेतृत्व वाले कौशल-अभ्यास और प्रवीणता पर बल देता है।
निर्देशित अन्वेषण में अधिगमकर्ता सहारे सहित जाँच करते हैं, जो शिक्षक द्वारा सीधे नियम प्रस्तुत करने के विरुद्ध है।
समस्या-आधारित अधिगम किसी प्रामाणिक समस्या से आरंभ होता है जिसे अधिगमकर्ता हल करें, न कि पहले से बताए नियम से।
व्याख्यात्मक शिक्षण औसुबेल के अर्थपूर्ण ग्रहण-अधिगम से जुड़ा है, जहाँ शिक्षक अधिगमकर्ता हेतु विषय-वस्तु को संरचित करता है।
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