जब संचार किसी समूह को उसके लक्ष्य प्राप्त करने में सहायता करता है, तो इसे कहते हैं:
जब संचार किसी समूह को उसके लक्ष्य प्राप्त करने में सहायता करता है, तो वह संवर्धक भूमिका (promotive role) निभा रहा होता है।
संवर्धक संचार सूचना देकर, समन्वय बनाकर और साझा प्रयास को प्रोत्साहित कर समूह को आगे बढ़ाता है।
विघटनकारी भूमिका (disruptive role) इसके विपरीत सहयोग को तोड़ती है और लक्ष्य में बाधा डालती है।
प्रतिकारी भूमिका (counteractive role) किसी प्रस्तावित दिशा के विरुद्ध कार्य करती है और समूह की गति को रोकती या विरोधित करती है।
भक्तिपरक भूमिका (devotional role) श्रद्धा या उपासना से जुड़ी है और समूह के कार्य-निष्पादन से इसका कोई संबंध नहीं।
समूह की कार्य-भूमिकाएँ इसी आधार पर वर्गीकृत होती हैं कि वे साझा उद्देश्य में सहायता, बाधा या प्रतिकार करती हैं।
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