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निम्नलिखित में से कौन-कौन किशोर शिक्षार्थियों की विशेषताएँ हैं?

1.अधिक संवेगात्मक संवेदनशीलता
2.आत्म-अनुशासन का उच्च स्तर
3.सामाजिक-सम्बद्धता की प्रबल आवश्यकता
4.अमूर्त चिन्तन के लिए संज्ञानात्मक विकास
5.संवेगात्मक वैधता
Aकेवल 1 व 4
Bकेवल 2 व 3
Cकेवल 4, 3 व 5
Dकेवल 1, 3, 4 व 5 ✓ Correct
Correct answer: (D) केवल 1, 3, 4 व 5
Explanation

किशोर शिक्षार्थी अधिक संवेगात्मक संवेदनशीलता, सामाजिक-सम्बद्धता की प्रबल आवश्यकता, अमूर्त चिंतन के लिए संज्ञानात्मक विकास और संवेगात्मक परिवर्तनशीलता दिखाते हैं।

बढ़ी हुई संवेगात्मक संवेदनशीलता किशोरावस्था की पहचान है, जिसमें भावनाएँ तीव्र और बदलती रहती हैं।

सामाजिक-सम्बद्धता की प्रबल आवश्यकता सहपाठी-उन्मुखता और पहचान-निर्माण को प्रेरित करती है।

अमूर्त चिंतन के लिए संज्ञानात्मक विकास किशोरों को विचारों और संभावनाओं से तर्क करने देता है।

संवेगात्मक परिवर्तनशीलता इस अवस्था की उतार-चढ़ाव भरी मनोदशाओं को दर्शाती है।

आत्म-अनुशासन का उच्च स्तर किशोरों में सामान्य नहीं है, क्योंकि आत्म-नियमन अभी विकसित हो रहा होता है।

पियाजे ने अमूर्त तर्कणा को औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था में रखा, जो किशोरावस्था में आरंभ होती है।

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