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सांस्कृतिक उद्योग के रूप में जनसंचार माध्यमों की प्रमुख आलोचनाएँ निम्नलिखित में से कौन-सी हैं?

1.जनसंचार माध्यम जन-हितैषी हैं।
2.सांस्कृतिक उद्योग के उत्पाद मानकीकृत होते हैं।
3.उत्पादन सौंदर्यगत गुण से रहित होते हैं।
4.सांस्कृतिक उद्योग एकरूप बड़े पैमाने का उत्पादन करता है।
5.यह संस्कृति के जनसमूहीकरण से बचता है।
Aकेवल 1, 2 और 3
Bकेवल 2, 3 और 4 ✓ Correct
Cकेवल 3, 4 और 5
Dकेवल 1, 4 और 5
Correct answer: (B) केवल 2, 3 और 4
Explanation

सांस्कृतिक उद्योग के रूप में जनसंचार माध्यमों की प्रमुख आलोचनाएँ यह हैं कि इनके उत्पाद मानकीकृत, सौंदर्यगत गुण से रहित और एकरूप बड़े पैमाने के उत्पादन से बने होते हैं।

मानकीकरण, कथन 2, का अर्थ है कि सांस्कृतिक उद्योग के उत्पाद निर्धारित सूत्रों का अनुसरण करते हैं जिससे फिल्में, गीत और कार्यक्रम एक-दूसरे जैसे हो जाते हैं।

सौंदर्यगत गुण से रहित होना, कथन 3, यह आरोप है कि व्यावसायिक गणना असली कलात्मक मूल्य को दबा देती है।

एकरूप बड़े पैमाने का उत्पादन, कथन 4, बताता है कि सांस्कृतिक वस्तुएँ अधिकतम बाज़ार के लिए कारखाना-वस्तुओं की तरह निकाली जाती हैं।

जनसंचार माध्यमों के जन-हितैषी होने का दावा, कथन 1, आलोचना नहीं बल्कि सकारात्मक कथन है, अतः यह उपयुक्त नहीं।

यह विचार कि यह संस्कृति के जनसमूहीकरण से बचता है, कथन 5, असत्य है, क्योंकि आलोचना मानती है कि यह जनसमूहीकरण को बढ़ाता है।

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