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निम्नलिखित में से किन्हें किशोरावस्था के दौरान संवेगात्मक परिवर्तन कहा जा सकता है?

1.यह अंतःकरण-निर्माण (conscience formation) का चरण है।
2.यह सोचने और कार्य करने का अजेय (invincible) चरण है।
3.आनुवंशिक परिवर्तनों का पर्यावरणीय कारकों से संबंध विभेदी सुग्राह्यता प्रतिमान (differential susceptibility model) कहलाता है।
4.कामेच्छा (libido) का पुनर्जागरण होता है।
5.परिणाम लड़कों की अपेक्षा लड़कियों के लिए अधिक प्रतिकूल होते हैं।
Aकेवल 1, 2 और 3
Bकेवल 2, 3 और 4
Cकेवल 1, 3 और 5
Dउपर्युक्त सभी ✓ Correct
Correct answer: (D) उपर्युक्त सभी
Explanation

सूचीबद्ध सभी विशेषताएँ किशोरावस्था के संवेगात्मक परिवर्तनों का वर्णन कर सकती हैं, अतः उत्तर उपर्युक्त सभी है।

किशोरावस्था अंतःकरण-निर्माण का चरण है, जिसमें मूल्य और नैतिकता परिपक्व होते हैं।

किशोर प्रायः स्वयं को अजेय अनुभव करते हैं, यह भाव किशोर आत्मकेंद्रितता के 'पर्सनल फेबल' से जुड़ा है।

विभेदी सुग्राह्यता प्रतिमान परिणामों को आकार देने में आनुवंशिक परिवर्तन को पर्यावरणीय कारकों से जोड़ता है।

कामेच्छा का पुनर्जागरण इस चरण की यौवनारंभ-जनित संवेगात्मक उभार को चिह्नित करता है।

शोध यह भी बताता है कि कुछ प्रतिकूल संवेगात्मक परिणाम लड़कों की अपेक्षा लड़कियों के लिए अधिक हो सकते हैं।

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