लेखन-कौशल में पाठ्यचर्या-रूपरेखा विकसित करने हेतु निम्नलिखित में से कौन-सा गतिविधि-समुच्चय सर्वाधिक प्रासंगिक माना जाता है?
लेखन-कौशल रूपरेखा हेतु सर्वाधिक प्रासंगिक गतिविधि-समुच्चय है नियोजन, गढ़ना, संप्रेषण, चिंतन और मूल्यांकन, जो एक पूर्ण प्रक्रिया-चक्र है।
नियोजन और गढ़ना प्रारूप बनाते हैं, संप्रेषण उसे साझा करता है, चिंतन उसे संशोधित करता है और मूल्यांकन उसका आकलन करता है।
विकल्प A में गढ़ना दो बार दोहराया गया है और चिंतन-चरण छूट जाता है, जिससे स्वाभाविक क्रम टूटता है।
विकल्प B में केवल चार चरण हैं और संप्रेषण तथा चिंतन के चरण पूर्णतः छूट जाते हैं।
विकल्प D में सूत्रबद्ध करना और तैयारी शिथिल रूप से हैं और पुनः संप्रेषण व मूल्यांकन छूट जाते हैं।
यह लेखन के प्रक्रिया उपागम (process approach) को दर्शाता है, जो लेखन को एकल उत्पाद नहीं, पुनरावर्ती प्रारूपण मानता है।
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