ऑनलाइन शिक्षण-विधियों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से कथन लागू होते हैं?
ऑनलाइन शिक्षण में अधिगमकर्ता की अनुदेशन-प्रक्रिया में अधिक भूमिका होती है और स्व-अधिगम एवं अभिप्रेरणा की अधिक संभावनाएँ होती हैं, अतः कथन 2 और 4 उत्तर हैं।
ऑनलाइन विधियाँ अधिगमकर्ता-केंद्रित हैं, जो ज्ञान-निर्माण के केंद्र में विद्यार्थी को रखती हैं।
वे स्व-गति, स्व-प्रेरित अध्ययन और आंतरिक अभिप्रेरणा के लिए व्यापक अवकाश खोलती हैं।
यह दावा कि शिक्षक ज्ञान-निर्माण में सहायता नहीं करता (कथन 1) असत्य है, क्योंकि ऑनलाइन शिक्षक उसे सुगम बनाता है।
ऑनलाइन संप्रेषण सदैव मौखिक नहीं होता (कथन 3); यह मल्टीमीडिया, पाठ और अंतःक्रिया का प्रयोग करता है।
ऑनलाइन अधिगम कठोर के बजाय लचीला होता है (कथन 5), जो विविध गति और मार्ग की अनुमति देता है।
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