अधिगम के किस सिद्धांत ने पाया कि आंतरिक प्रक्रियाओं का ज्ञान अधिगम को समझने हेतु अनिवार्य है?
संज्ञानात्मक सिद्धांत अधिगम को प्रत्यक्षण, स्मृति, चिंतन और अंतर्दृष्टि जैसी आंतरिक मानसिक प्रक्रियाओं में परिवर्तन मानता है, केवल बाह्य व्यवहार में नहीं।
उद्दीपक-अनुक्रिया सिद्धांत अधिगम को उद्दीपक और अनुक्रिया के दृश्य संबंधों तक सीमित कर देता है, आंतरिक संज्ञान को छोड़ देता है।
बी.एफ. स्किनर का क्रियाप्रसूत अनुबंधन व्यवहार को उसके परिणामों के पुनर्बलन से समझाता है, जो पुनः बाह्य है।
इवान पावलॉव का चिरसम्मत अनुबंधन एक उदासीन उद्दीपक को स्वाभाविक उद्दीपक से जोड़कर अनुबंधित अनुक्रिया बनाता है।
जीन पियाजे और गेस्टाल्ट (Gestalt) संप्रदाय अधिगम के प्रमुख संज्ञानात्मक सिद्धांतकार हैं।
वोल्फगांग कोहलर का अंतर्दृष्टि अधिगम समस्या के अचानक आंतरिक पुनर्गठन को दर्शाता है, जो विशुद्ध संज्ञानात्मक घटना है।
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