निम्नलिखित में से किसने निपुणता अधिगम (mastery learning) की अवधारणा दी है?
निपुणता अधिगम की अवधारणा कार्लटन वॉशबर्न (Carlton Washburne) ने 1920 के दशक की विनेटका योजना (Winnetka Plan) द्वारा दी।
निपुणता अधिगम मानता है कि पर्याप्त समय और उपयुक्त परिस्थितियाँ मिलने पर लगभग सभी विद्यार्थी विषय-वस्तु में निपुण हो सकते हैं।
वॉशबर्न की विनेटका योजना विद्यार्थियों को प्रत्येक इकाई में निपुणता के बाद ही अपनी गति से आगे बढ़ने देती थी।
बेंजामिन ब्लूम ने बाद में इसे 'लर्निंग फॉर मास्टरी' के रूप में विकसित किया, पर मूल अवधारणा वॉशबर्न से आती है।
अल्बर्ट बंडूरा सामाजिक अधिगम से जुड़े हैं, निपुणता अधिगम से नहीं।
डेविड ऑसुबेल ने अर्थपूर्ण ग्रहणशील अधिगम और एडवर्ड थॉर्नडाइक ने अधिगम के नियम दिए, दोनों भिन्न अवधारणाएँ हैं।
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